होलाष्टक के 8 दिन क्यों माने गये हे अशुभ , क्यों नही करने चाहिये इन दिनों में शुभ काम

इस वर्ष 21 मार्च को होली हे होली तिथि की गिनती होलाष्टक के आधार पर होती हे फाल्गुन शुक्ल पश की अष्टमी से लेकर आठवे दिन यानि होलिका दहन तक होलाष्टक रहता हे

इसके अनुसार होलाष्टक के आठ दिनों तक कोई शुभ काम नही किया जाता हे यदि आप कोई शुभ काम करते हे तो आप का कम बिगड़ जाता हे होलाष्टक के अनुसार इसलिए शुभ काम का ठाल देने में ही भलाई हे

क्या हे होलाष्टक :

होलाष्टक का आशय हे होली के पूर्व के आठ दिन हे , जिसे होलाष्टक कहते हे धर्मशाला में वर्णित 16 संस्कार जैसे – गर्म्धन विवाह , पुसवन ,नामकरण , चुडाकरन , विधार्न्भ , घरप्रवेश , ग्रह निर्माण ,ग्रह शांति , हवन -यझ कर्म आदि नही किये जाते

होलाष्टक की परम्परा :

जिस दिन से होलाष्टक प्राम्भ होता हे , गली मोह्लो के चोराहो पर जहा – जहा परंपरा स्वरूप होलिका दहन मनाया जाता हे उस जगह पर गंगाजल का छिडकाव कर प्रतीक स्वरूप दो डंडो को स्थापित किया जाता हे एक डंडा होलिका का एव दूसरा भक्त प्र्हद का माना जाता हे | इसके प्रशात यहाँ लकडिया और उपले लगाए जाने लगते हे | जिन्हें होली के दिन जलाया जाता हे जिसे होलिका दहन कहा जाता हे

क्यों होते हे ये अशुभ दिन ? :

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार होलाष्टक के प्रथम दिन अथार्त फलुगन शुक्लपश की अष्टमी को चद्रमा , नवमी को सूर्य , दशमी को शनि , एकादशी को शुक्र , दुर्द्शी को गुरु , त्रियोंदर्शी को बुध , चुत्र्दर्शी को मंगल तथा पूर्णिमा को राहू का उरग रूप रहता हे इस वजह से इन आठो दिन मानव मस्तिक तमाम विकारो , शंकाओ और धुविदाओ आदि से गिरा रहता हे , जिनकी वजह से शुरू किए गए कार्य के बनने के बजाए बिगड़ने की संभावना जायदा रहती हे चेत्र क्रष्ण प्रतिपदा को इन आठो ग्रहों को नकारत्मक शक्तिओ के कमजोर होने की खुशी में लोग अबीर – गुलाग आदि के इस त्यौहार मनाते हे और खलेते हे जिसे होली कहते हे

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