एड्स का मिल गया ईलाज ? लंदन का मरीज़ HIV इन्फेक्शन से पूरी तरह मुक्त जाने पूरी जानकारी

दुनिया में दूसरी बार एड्स के किसी मरीज को एड्स virus से मुक्त करने में कामयाबी मिली हे डॉक्टर की इस सफलता से एड्स के जड से सफाये की उमीद कायम हुई हे

हाल ही में लंदन में रहने वाला एड्स का एक मरीज़ स्टेम सेल ट्रांसप्लांट के बाद एचआइवी इन्फेक्शन से पूरी तरह मुक्त हो गया हे यह खबर दुनिया भर में एड्स के मरीजों के लिए उमीद की एक किरण बनकर आई हे इससे करीब 12 साल पहले बर्लिन के एक मरीज़ टिमोथी ब्राउन का भी इसी तरह से इलाज किया गया था और उसे एड्स वायरस से मुक्त कर दिया गया था लेकिन दुनिया भर के वैज्ञानिक और एड्स वायरस पर शोध कर रहे डॉक्टरो ने आगाह किया हे की अभि यह खेना गलत हे की एड्स का इलाज खोज लिया गया हे

CCR5 का कमाल :

टिमोथी ब्राउन को जिस शख्स ने बॉन मेरो डोनेट किया था , उसके शरीर में एक अनोखी आनुवाषिक गडबडी थी | यह गडबडी उसकी शवेत रक्त कोशिकाओ या ब्लड सेल्स की सतह पर मोजूद रिसेप्टर मोलिक्युल CCR5 के जीन में थी इस गडबडी की वजह से उसे कोई परेशानी तो नही हुई उलटे फायदा हुआ |

एक और सुराग :

बोने मेरो ट्रांसप्लांट के बाद टिमोथी ब्राउन और लंदन के मरीज़ को ‘ग्राफ्ट व्सेर्ज होस्ट’ बीमारी हो गयी थी इसमें नया बोनमेरो मरोज़ के शरीर को दुश्मन समझकर उसकी कोशिकाओं के खिलाफ कम करने लगता हे यही स्थिति लंदन के मरीज़ के साथ भी हुई | प्रयोग पर नजर रखने वाले विशेषज्ञो का कहना हे की बहुत मुमकिन हे की ग्राफ्ट व्सेज होस्ट बीमारी ने एड्स वायरस का सफाया कर दिया हो

इसकी सीमाए हे :

लेकिन यह आनुवाशिक गडबडी बहुत दुर्बल हे , ऐसे डोनर खोज पाना बहुत मुश्किल काम हे अगर ऐसा डोनर मिल भी गया तो बोन मेरो ट्रांसप्लांट में बहुत जोखिम हे टिमोथी ब्राउन को महीनो तक कई कोमिप्लश्न्स का सामना करना पड़ा | उने एक बार मेडकल में कोमा तक रखने की नोबत आ गयी

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